स्वतंत्रता - दिवस (15 अगस्त) निबंध


15 अगस्त, 1947 का दिन हमारे देश के लिए गौरव का दिन है | अनेक देशभक्तों के बलिदान के फलस्वरूप हमारा देश आज ही के दिन आज़ाद हुआ था | यह दिन स्वतंत्रता दिवस के रूप में देशभर में बहुत हर्ष उल्लास के साथ मनाया जाता है |

लोक मान्य तिलक, सुभाष चंद्र बोस, शहीद भगत सिंह, महात्मा गाँधी, लाला लाजपत राय आदि अनेक नेताओं ने भारत माता को स्वतंत्र कराने के लिए संघर्ष किया | लोकमान्य तिलक ने कहा था स्वराज्य हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है | इसे हम लेकर रहेंगे | सुभाष चंद्र बोस ने भारतवासियों को ललकारते होये कहा था - "तुम मुझे खून दो और मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा |" महात्मा गाँधी ने भी सन् 1942 में ' करो या मरो' का नारा दिया |

15 अगस्त, 1947 को भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने दिल्ली में लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया था | तभी से प्रत्येक वर्ष 15 अगस्त के दिन यहाँ राष्ट्रध्वज फहराया जाता है | इस दिन भारत के प्रधानमंत्री लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं, राष्ट्र के नाम सन्देश देते हैं |

विद्यालयों में भी स्वतंत्रता दिवस समारोह बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है | सभी छात्र - छात्राएँ और अध्यापक विद्यालय में प्रातः आजाते  हैं | इस अवसर पर देश भक्ति के गीत सुनने योग्य होते हैं | विद्यालयों में मिष्टान्न वितरण भी किया जाता है |

15 अगस्त के दिन हमें प्रण करना चाहिए कि हम अपने देश कि आज़ादी की रक्षा के लिए अपना सब कुछ बलिदान कर देंगे, क्योंकि यह स्वतंत्रता - दिवस हमारी राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक है |
 
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