खेलों का जीवन में महत्व


खेल ही जीवन है, जीवन ही खेल है | जीवन में खेलों का अपना महत्व है | इसलिए महात्मा गाँधी जी ने शिक्षा के साथ - साथ खेल को जोड़ा है | किताबी शिक्षा अपूर्ण होती है | खुला आसमान उसका असली स्थान है | इसीलिए शिक्षण संस्थाओं में खेलकूद का नियमित होना आवश्यक समझा गया है | खेल को ही जीवन जिसने मान लिया है वह जीवन भर जवानी का अनुभव और आनंद प्राप्त करता है | उसके जीवन में उल्लास, रस, उत्साह, आनंद, आशा, स्फूर्ति, शक्ति होती है | 

खेल हमारे जीवन में अत्यधिक महत्त्वपूर्ण है | खेल खेलने से हमारे मन में प्रतियोगिता की भावना पैदा होती है | खिलाड़ी मिल - जुलकर खेलते हैं, इसीलिए उनमें पारस्परिक सहयोग की भावना पैदा होती है | खेल त्याग की भावना से ओत - प्रोत होता है | खिलाड़ी स्वयं के लिए नहीं, बल्कि टीम के लिए खेलता है, देश के लिए खेलता है | मनुष्य ने जीवन में मनोरंजन के नए - नए साधन जुटाए हैं | खेल भी मनोरंजन का एक साधन है | कुछ खेल शारीरिक क्षमता वाले होते हैं, तो कुछ मानसिक, लेकिन सभी खेलों में बुद्धि की आवश्यकता पड़ती है | खेलों से शरीर स्वस्थ व सुगठित बनता है, मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं, शरीर में रक्त - संचार रूप से चलता है | किसी भी खेल को खेलने के लिए लगन, अभ्यास और परिश्रम की आवश्यकता होती है | 

खेल के प्रकार प्रमुख रूप से दो है देशी खेल व विदेशी खेल कबड्डी, खो - खो, गुली - डंडा आदि देशी खेल हैं | क्रिकेट, फुटबॉल, थ्रोबॉल आदि विदेशी खेल है | देशी खेल कम खर्चीले और गाँव के लोगों के लिए सुलभ होते हैं, विदेशी खेल खर्चीले | साधरण लोगों के लिए देशी खेल ही उत्तम है | विदेशी खेलों में क्रिकेट बहुत लोकप्रिय है | जब कभी जहाँ कहीं क्रिकेट की प्रतियोगिता प्रारम्भ हुई लोग इसका प्रसारण सुनने के लिए रेडियो, टी. वी के पास एकत्रित हो जाते हैं और खान - पान छोड़कर प्रसारण सुनने में व्यस्त हो जाते हैं |

स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का निवास होता है | स्वास्थ्य को अच्छा रखने के लिए खेल ही रामबाण है | अस्वस्थ व्यक्ति न तो स्वयं का हित कर सकता है न देश का | खेलों से मनुष्य में सामाजिक भावनाएँ उत्पन्न होती हैं | स्वामी विवेकानंद हमेशा देश के युवकों से बलवान बनने को कहते थे | खेल हमें अच्छा इंसान बनने की प्रेरणा देते हैं | खेल से मनुष्य का शरीर स्वस्थ बनता है | अनुशासन की भावना उत्पन्न होती है | खेल मनोरंजन का एक महत्त्वपूर्ण साधन है | जीवन में चुस्ती, फुर्तीलापन, आत्मबल, संगठन एवं एकता की भावना खेल से ही उत्पन्न होती है | खेल जीवन के प्रतीक क्षेत्र में प्रगति के लिए आवश्यक है |

खेल में हार जीत, सफलता - असफलता का कोई महत्त्व नहीं है | खिलाड़ी भावना का सबसे अधिक महत्व होता है | जिस देश के खिलाड़ी, खिलाड़ी भावना रखते हैं उसी के अनुरूप खेलते हैं वह देश वास्तव में हर क्षेत्र में महान बनता है | खेल में खिलाड़ी भावना का होना बहुत आवश्यक है | 
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