अव्यय शब्द (Indeclinable)


अव्यय शब्द

संस्कृत ज्ञान के लिए अव्यय शब्दों का ज्ञान होना भी परमावश्यक है। इन शब्दों को अव्यय इसलिए कहते है, क्योंकि इनमें लिंग, वचन, विभक्ति के अनुसार किसी भी प्रकार का कोई भी परिवर्तन नही होता है।  

अव्यय शब्दों का संस्कृत वाक्यों में प्रयोग - 

अधूना अहम् संस्कृतं पठामि  ।
इदानीम्  मोहनः गृहे नास्ति ।
त्वम्  शीघ्रं मा गच्छ ।
छात्राः प्रातः भ्रमन्ति ।
अहम् कदाचित् पठामि ,कदाचित् लिखामि ।
ते शनैः शनैः गच्छन्ति ।
यावद्  अहम् आगच्छामि , तावत् त्वं तत्रैव तिष्ठ ।
ज्ञानम् बिना सुखम् न भवति ।
यदि सः गच्छति तर्हि अहम् अपि गच्छामि ।
त्वं इतस्ततः वृथा किमर्थम् भ्रमसि ।

इस प्रकार अव्यय शब्दों का प्रयोग संस्कृत वाक्यों में किया जाता है |


अत्र का वाक्य प्रयोग संस्कृत में 
राम: अत्र आगच्छ।
त्वं पुष्प अत्र आनय।
उद्याने पुष्पं अत्रापि अस्ति।

प्रथमं अत्र आगच्छ च जलं पिब।


एवम् का वाक्य प्रयोग संस्कृत में 
एवम् सर्वत्र विजयो भविष्यति।
एवम् अहम् सर्वदा पृसन्नो अस्मि।
स: एवम् अकथयत्।
पक्षिण: एवमेव उड्डयन्ते |


तत्र का वाक्य प्रयोग संस्कृत में 
अहम् तत्र गच्छामि।
राम: तत्र गत्वा पुष्पं नयति ।
सीता तत्र किं करोति।
त्वम् तत्र किं खादति ।


यथा का वाक्य प्रयोग संस्कृत में 
यथा अहम् कर्मं करोमि।
यथा परोपकार: जीवनगति: अस्ति।
यथा सत्यं सदा विजयते।
यथा अहम् पृतिदिनं व्यायामं करोमि।


अव्यय शब्द और उनके अर्थ निम्नलिखित है-

स्थानवाचक अव्यय 
 
संस्कृत शब्द हिंदी अर्थ 
अत्र  यहाँ
अन्यत्र दूसरी जगह
कुत्र, क्व कहाँ
तत्र वहाँ
यत्र जहाँ
यत्र -तत्र कहीं - कहीं
यत्रंकुत्र जहाँ कही
सर्वत्र सब जगह

समय वाचक अव्यय
 
संस्कृत शब्द हिंदी अर्थ 
अधुना आजकल
अद्य आज
अचिरात/ अचिरण शीर्घ
अजसम् सदा 
कदा कब
तदा तब
तदानीम् तब
क्षिप्रम् शीघ्र
दिवा दिन में
परश्वः परसों
प्रातः सुबह 
यदा कदा   कभी कभी
श्वः कल
ह्राः बिता हुआ कल
पुरा  पुराने समय से
अन्येधुः, परेधुः दूसरे दिन 

प्रकार वाचक अव्यय 
 
संस्कृत शब्द हिंदी अर्थ 
यथा      जिस प्रकार, जैसे
एवम् इस तरह
इत्यम ऐसे
सर्वथा सब प्रकार
तथा उस प्रकार (वैसे)
कथम् किस प्रकार (कैसे)
एवम् इस प्रकार (ऐसे)
सम्भव अच्छी तरह
यथा- तथा जैसे- तैसे 

विविध अव्यय
 
संस्कृत शब्द हिंदी अर्थ
अपि भी
अलम् बस, पर्याप्त
अतः इसीलिए
अथ- किम् और क्या, (जी हाँ )
अधः,अधस्तात् नीचे
अग्रे आगे
अन्यथा नहीं तो
अन्यत् दूसारा
आम् जी हां
अंतरा बीच में
इतस्ततः इधर - उधर
इव समान
उपरी ऊपरी
उच्चैः ऊँचे
एव ही
कृते के लिए
क्व कहाँ
किन्तु लेकिन
कुतः कहां से 
और
तूष्णीम् चुपचाप
ततः वहां से (इसके बाद)
नहीं
पश्चात् बाद में, पीछे
पुनः फिर
प्रायः बहुधा
बहि बाहर
वृथा व्यर्थ में
महते नीच में
यतः क्योंकि
शनैः शनैः धीरे धीरे
सहसा एकाएक
सकृत् एक बार
सह साथ
समक्षम् सामने

Sanskrit Grammar

time: 0.0296750069